क्या आप भी चाहते हैं कि आप कोई भी गाना पहली बार में ही सुरीला और मधुर गा सकें? अगर हाँ, तो यह आर्टिकल आपके लिए बहुत उपयोगी होने वाला है। इस गाइड में हम आपको 3 ऐसे ज़रूरी तरीके बताएंगे जिनसे आप किसी भी गाने को बेहतर और सुरीला गा सकते हैं। यह तरीके 7 साल के संगीत अनुभव पर आधारित हैं और इन्हें अपनाने से आपकी गायकी में ज़बरदस्त सुधार आएगा।
1. अपने स्केल के हर एक नोट का अभ्यास करें
सबसे पहली और सबसे ज़रूरी बात जो एक अच्छे गायक को सीखनी चाहिए वह यह है कि हमें किसी एक स्केल को पकड़ कर उसके हर एक स्वर का कई घंटे तक रियाज़ करना चाहिए। क्योंकि दोस्तों, कोई भी गाना किसी एक स्केल पर टिका होता है, और जब तक हमारा गला एक स्केल में सही तरह से गा नहीं पाएगा, तब तक हम किसी भी गाने को अच्छे से नहीं गा सकते।
इसे एक उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए आप “कल हो न हो” गाने का रियाज़ कर रहे हैं और उस गाने का स्केल है C मेजर। आपने उसकी एक लाइन को काफी अच्छे से गा लिया यानी सभी स्वर उस स्केल में सही रहे, इसलिए वह लाइन अच्छी सुनाई दी। लेकिन जैसे ही आप अगली लाइन पर गए, वह काफी बेसुरी सुनाई दी, क्योंकि उस लाइन के स्वर सही से नहीं लगे।
दोस्तों, कोई भी गाना बेसुरा तभी सुनाई देता है जब वह गाना एक प्रॉपर स्केल में नहीं रहता। इसलिए जिस भी स्केल में आपको गाना अच्छा लगता हो, उसके सभी स्वरों का रियाज़ नियमित रूप से करें।
2. स्वर पूर्णता के लिए अलंकारों का अभ्यास करें
अगर आप चाहते हैं कि आप कोई भी गाना पहली ही बार में अच्छे से गा सकें, तो आपको अलंकार का रियाज़ ज़रूर करना चाहिए। अलंकार का अभ्यास इसलिए ज़रूरी है क्योंकि इससे आप मुश्किल से मुश्किल स्वर के वेरिएशन को भी आसानी से गा सकते हैं।
उदाहरण के तौर पर, बहुत से लोग मध्य सप्तक के स्वर के तुरंत बाद तार सप्तक के स्वर नहीं गा पाते। यह इसलिए होता है क्योंकि उन्होंने स्वर के वेरिएशन का रियाज़ सही से नहीं किया होता। अलंकार का अभ्यास करने से यह समस्या दूर हो जाती है।
ध्यान दें: अलंकार का रियाज़ तब शुरू करें जब आपके सभी बुनियादी स्वर पक्के हो जाएं। अगर आपके स्वर ही गलत हैं, तो अलंकार का रियाज़ व्यर्थ हो जाएगा। पहले स्वर पक्के करें, फिर अलंकार का अभ्यास करें।
3. गाने को स्मार्ट तरीके से सुनें और समझें
यह तीसरा तरीका तब काम आता है जब आप ऊपर दिए गए दोनों काम अच्छे से कर चुके हों। बिना स्वरों का सही रियाज़ किए, गाने को कितना भी अच्छे से सुन लो, आप सही तरह से नहीं गा पाएंगे।
स्वरों का अच्छे से रियाज़ करने के बाद, आपको जो भी गाना गाना हो, उसे ध्यान से सुनें। गाने को छोटे-छोटे टुकड़ों में बाँट दें और हर एक टुकड़े को तब तक सुनें जब तक वे स्वर आपके दिमाग में अच्छी तरह बैठ न जाएं। फिर धीरे-धीरे पूरे गाने के स्वरों को मन में बैठाएं और लिरिक्स के साथ उस गाने को गाने की कोशिश करें।
समय के साथ आपके कान इतने trained हो जाएंगे कि कोई भी गाना सुनते ही आपका दिमाग तुरंत नोट्स बनाने लगेगा। बस इस काम को consistently करते रहें। किसी भी मुश्किल लाइन को skip न करें — जब तक वह लाइन अच्छे से न आ जाए, तब तक उसका रियाज़ करते रहें।
संक्षेप में – मुख्य बातें याद रखें
इस आर्टिकल में हमने तीन मुख्य बातें सीखीं:
- स्केल का रियाज़: जिस स्केल में गाने में सहूलियत हो, उसके सभी नोट्स का नियमित अभ्यास करें ताकि स्वर सही लगें और आप बेसुरा न गाएं।
- अलंकार का अभ्यास: स्वर पक्के होने के बाद अलंकार का रियाज़ करें जिससे स्वरों में वेरिएशन आएगा और क्लासिकल गाने भी आसान हो जाएंगे।
- स्मार्ट तरीके से सुनना: गानों को टुकड़ों में बाँटकर सुनें, कठिन लाइनों को skip न करें और consistently रियाज़ करें।
दोस्तों, यह पूरी जानकारी 7 साल के संगीत अनुभव पर आधारित है। अगर आपने इन तीनों स्टेप्स को ईमानदारी से follow किया, तो आपकी गायकी में ज़रूर बहुत सुधार आएगा। नियमित अभ्यास ही सफलता की कुंजी है।
